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मध्यप्रदेश की नदियां :- मध्यप्रदेश में पठार एवम् पहाड़ी क्षेत्रों की अधिकता के कारण यहां कई नदियों का उद्गम है , इसलिए इसे  नदियों का मायका  भी कहा जाता है। मध्यप्रदेश में  207 छोटी - बड़ी नदियां  प्रवाहित होती है।                      मध्यप्रदेश की नदियां प्रमुख नदियां :- नर्मदा : - उद्गम  - अनूपपुर जिले में मैकल‌ पर्वत श्रेणी की  अमरकंटक  पहाड़ी पर स्थित नर्मदा कुंड से। इसे  मध्यप्रदेश की जीवनरेखा  कहा जाता है। इसे  मप्र की गंगा  कहा जाता है। यह  भारत की 5 वीं सबसे बड़ी  नदी है। इसकी  कुल लंबाई 1312 किमी  है , तथा  मप्र में  इसकी लंबाई  1077 किमी  है। यह खम्बात की खाड़ी में एश्चुरी बनाते हुए गिरती है। नर्मदा नदी का  अपवाह तंत्र वृक्षाभ  प्रणाली वाला है। इसे भुगोलविद टालमी ने  नामोदास  कहा है। अन्य नाम -  रेवा , सोमोदेवी , मेकलसुता  आदि। इसकी कुल 41 सहायक नदियां है। सहायक नदियां  - कुंदी , शेर , हिरन , द...
मप्र की जनगणना 2011                जनगणना 2011 1872  में  लॉर्ड मेयो  के शासनकाल में भारत में  पहली जनगणना  हुई थी। परंतु  विधिवत  रूप से नियमित  जनगणना   1881  ई. में  लॉर्ड रिपन  के समय प्रारंभ हुई। जनसंख्या  संघ सूची का विषय  है। 11 जुलाई  को  विश्व जनसंख्या दिवस  मनाया जाता है। 11 मई  को  मप्र में जनसंख्या नियंत्रण दिवस  के रूप में मनाया जाता है। मप्र में जनगणना वर्ष  2011 में   सी. चंद्रमौली  ( भारत जनगणना आयुक्त )  के नेतृत्व में संपन्न  हुई, जिसके प्रमुख बिंदु निम्न. है। जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार ,  मप्र सम्पूर्ण भारत में जनसंख्या की दृष्टि  से  6 वां स्थान   रखता है तथा   वर्तमान में 5 वां   स्थान रखता है  (उप्र , महाराष्ट्र , बिहार , प. बंगाल एवं मप्र) मप्र की कुल जनसंख्या  7,26,26,809  है , जो देश की कुल जनसंख्या के  6%  है। मप्र की कुल जनसंख्या में पुर...
मध्यप्रदेश का गठन  :-  one liner fact :                    ब्रिटिशकाल में मध्यप्रदेश को  सेंट्रल प्रोविंस  और  बरार  नाम से जाना जाता था। कुछ  अन्य रियासते  भी थी , जैसे - पूर्व में  बघेलखंड  ,  छत्तीसगढ़  व  दंडकारण्य  रियासते , पश्चिम में  मध्य भारत  , उत्तर में  विंध्य प्रदेश  तथा मध्य में  महाकौशल  और  भोपाल  की रियासते। स्वतंत्रता के बाद मध्यप्रदेश को निम्न स्टेट में बांटा गया - पार्ट A स्टेट :  सेंट्रल प्रोविंस , बरार , बघेलखंड , छत्तीसगढ़ ,  दंडकारण्य , महाकौशल तथा विदर्भ की रियासतों को मिलाया गया। तथा  राजधानी नागपुर  रखी गई।   पार्ट B स्टेट :  मध्य भारत को पार्ट B स्टेट में रखा गया तथा इसकी  राजधानी ग्वालियर  एवम्  इंदौर  बनाई गई। पार्ट C स्टेट :   विंश्यप्रदेश को पार्ट C के अंतर्गत रखा गया तथा इसकी  राजधानी रीवा  को बनाया गया। भोपाल  को एक स्वतंत्र प्...

भ्रंश घाटी, रैम्प घाटी, ब्लाॅक पर्वत एवं हॉर्स्ट पर्वत क्या है ?

  भ्रंश के कारण धरातल पर कई प्रकार की भू-आकृतियों का जन्म होता है - भ्रंश घाटी (Rift Valley) रैम्प घाटी (Ramp Valley) भ्रंशोत्थ/ब्लाॅक पर्वत (Block Mountain) हॉर्स्ट पर्वत (Horst Mountain) भ्रश घाटी (Rift valley) :- जब दो समान्तर भ्रंशों का मध्यवर्ती भाग नीचे की और धंस जाता है, तों इस प्रकार निर्मित घाटी भ्रंश घाटी कहलाती है। इसे जर्मन भाषा में ग्राबेन ( GRABEN) कहा जाता है। सर्वप्रथम ग्रेगौरी नामक भू-गर्भशास्त्री ने अफ्रीका की महान भ्रंश घाटी को देखकर भ्रंश घाटी शब्द का प्रयोग किया था । यह भ्रंश घाटी उत्तरी सिरिया से आरंभ होकर जार्डन घाटी, आकाबा की खाड़ी, लाल सागर, अबीसीनिया और पूर्वी अफ्रीका होती हुई जाम्बेजी नदी तक लगभग 5000 किमी की लंबाई में फैली है । विश्व की अन्य प्रसिद्ध भ्रंश घाटियों में जर्मनी में वास्जेज व काले जंगल (Black forest) के मध्य राइन, अमेरिका में मृत घाटी, भारत में नर्मदा ताप्ती व ऊपरी दामोदर नदी आदि शामिल हैं । जॉर्डन का मृत सागर, अफ्रीका में न्यासा, टाँगानिका झीलें आदि भ्रश घाटियां ही हैं।                 भ्रंश घाटी र...

वायुमण्डल एवं उसकी परतें

वायुमण्डल एवं उसकी परतें  :- वायुमण्डल एक बहुस्तरीय गंधहीन, रंगहीन पारदर्शी गैसीय आवरण है, जो पृथ्वी को चारों तरफ से घेरे हुए है। यह सौर विकरण की लघु तरंगों के लिए पारदर्शी हैं, जबकि पार्थिव विकरण की लम्बी तरंगों के लिए अपारदर्शी है । इस प्रकार वायुमण्डल पृथ्वी पर औसत तापमान बनाए रखता है, जो पृथ्वी पर जीवन का आधार है । वायुमण्डल पृथ्वी से उसके गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा सम्बद्ध है, जो पृथ्वी की सतह से 10,000 किमी की ऊँचाई तक पाया जाता है । वायुमण्डल सौर विकिरण की लघु तरंगों के लिए पारदर्शी, जबकि पार्थिव विकिरण की दीर्घ तरंगों के लिए अपारदर्शी होता है, इस कारण यह ग्लास हाऊस की भांति कार्य करता है । वायुमण्डल पर जीवन योग्यग औसत तापमान (15°C) बनाए रखता है। वायुमण्डल अलग-अलग घनत्व तथा तापमान वाली परतों का बना हुआ है, जिसका विस्तार 10,000 किमी की ऊँचाई तक मिलता है । तापमान की स्थिति तथा अन्य विशेषताओं के आधार पर इसे 05 विभिन्न स्तरों में बांटा गया है। क्षोभमण्डल (Troposphere) :- यह वायुमण्डल का सबसे निचला स्तर है, जिसकी ऊँचाई सतह से लगभग 13 किमी तक पाई जाती है, किन्तु ध्रुवों पर यह...

विश्व की सबसे बड़ी नदियां एवं संबंधित महाद्वीप

  विश्व की सबसे बड़ी नदियां एवं संबंधित महाद्वीप  :- नील नदी - अफ्रीका   अमेज़न नदी - दक्षिण अमेरिका  यांगटीसिकियांग - एशिया   मिसिसिपी-मिसौरी - उत्तर अमेरिका    आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमारी ऐसी ही ओर पोस्ट को देखिए और अपने सुझाव comments section में दीजिए। यह भी देखिए  :- सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र | Trick प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र संकटापन्न जंतुओं के लिए राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य भारत के रेलवे जोन भारत के प्रमुख बंदरगाह भारत का भूगोल | सामान्य जानकारी

क्षेत्रफल में विश्व के सबसे बड़े एवं छोटे देश एवं अवस्थिति

क्षेत्रफल में विशव के सबसे बड़े देश एवं अवस्थिति :- रूस - यूरोप तथा एशिया कनाडा - उत्तरी अमेरिका चीन - एशिया यू. एस. ए. - उत्तरी अमेरिका  ब्राजील - दक्षिण अमेरिका आस्टेलिया - ओशेनिया भारत -  एशिया क्षेत्रफल में विश्व के सबसे छोटे देश एवं अवस्थिति :- वेटिकन सिटी -  यूरोप   मोनाको -  यूरोप   नौरू -  दक्षिण प्रशांत महासागर  तुवालू -  दक्षिण प्रशांत महासागर  सान मैरिनो -  यूरोप   लिचेंस्टीन -  यूरोप   मार्शल द्वीप -  मध्य प्रशांत महासागर  आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमारी ऐसी ही ओर पोस्ट को देखिए और अपने सुझाव comments section में दीजिए। यह भी देखिए  :- सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र | Trick प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र संकटापन्न जंतुओं के लिए राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य भारत के रेलवे जोन भारत के प्रमुख बंदरगाह भारत का भूगोल | सामान्य जानकारी भूगोल | ब्रह्मांड | सौरमंडल की जानकारी विश्व की प्रमुख जल सन्धियां चट्टान |आग्नेय|अवसादी|कायांतरित पृथ्वी की आंतरिक संरचना | सीमा क्षेत्र विश्व के प्रमुख...

विश्व की स्थानीय पवनें

  विश्व की स्थानीय पवनें  :- किसी स्थान विशेष में प्रचलित हवाओं के विपरीत चलने चाली पवनों को स्थानीय पवनें कहा जाता है । ये पवनें तापमान एवं वायुदाब के स्थानीय अंतर से चला करती हैँ और बहुत छोटे क्षेत्र को प्रभावित करती हैं । जहां एक और गर्म स्थानीय पवनें किसी स्थान विशेष तापमान में वृद्धि लाती है तो वहीं दूसरी और ठंडी स्थानीय पवनें कभी-कभी तापमान को हिमांक (Freezing point) से भी नीचे गिरा देती है। ये स्थानीय पवनें क्षोभमण्डल (Troposphere) की निचली परतों तक ही सीमित रहती है। कुछ प्रमुख स्थानीय पवनें निम्नलिखित हैं- फॉन (Fohn) :- उत्तरी अल्प्स की घाटियों में शिनूक के समान ही गर्म तथा शुष्क पवनें चलती हैं, जिन्हें फॉन कहा जाता है । इनका सर्वाधिक प्रभाव स्विट्जरलैंड में होता है । इन पवनों से जहाँ एक और बर्फ पिघल जाती है और मौसम सुहावना हो जाता है,तो वहीं दूसरी और इसके प्रभाव से अंगूर की फसल शीघ्र पक जाती है। सिराको (Sirocco) :- सहारा मरुस्थल से उत्तरी अफ्रीका, सिसली तथा दक्षिण इटली से गुजरने वाली शुष्क व रेत भरी पवनों को सिराको कहा जाता है । ये पवनें भू-मध्य सागर से गुज़रने ...