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भ्रंश घाटी, रैम्प घाटी, ब्लाॅक पर्वत एवं हॉर्स्ट पर्वत क्या है ?

  भ्रंश के कारण धरातल पर कई प्रकार की भू-आकृतियों का जन्म होता है - भ्रंश घाटी (Rift Valley) रैम्प घाटी (Ramp Valley) भ्रंशोत्थ/ब्लाॅक पर्वत (Block Mountain) हॉर्स्ट पर्वत (Horst Mountain) भ्रश घाटी (Rift valley) :- जब दो समान्तर भ्रंशों का मध्यवर्ती भाग नीचे की और धंस जाता है, तों इस प्रकार निर्मित घाटी भ्रंश घाटी कहलाती है। इसे जर्मन भाषा में ग्राबेन ( GRABEN) कहा जाता है। सर्वप्रथम ग्रेगौरी नामक भू-गर्भशास्त्री ने अफ्रीका की महान भ्रंश घाटी को देखकर भ्रंश घाटी शब्द का प्रयोग किया था । यह भ्रंश घाटी उत्तरी सिरिया से आरंभ होकर जार्डन घाटी, आकाबा की खाड़ी, लाल सागर, अबीसीनिया और पूर्वी अफ्रीका होती हुई जाम्बेजी नदी तक लगभग 5000 किमी की लंबाई में फैली है । विश्व की अन्य प्रसिद्ध भ्रंश घाटियों में जर्मनी में वास्जेज व काले जंगल (Black forest) के मध्य राइन, अमेरिका में मृत घाटी, भारत में नर्मदा ताप्ती व ऊपरी दामोदर नदी आदि शामिल हैं । जॉर्डन का मृत सागर, अफ्रीका में न्यासा, टाँगानिका झीलें आदि भ्रश घाटियां ही हैं।                 भ्रंश घाटी र...

वायुमण्डल एवं उसकी परतें

वायुमण्डल एवं उसकी परतें  :- वायुमण्डल एक बहुस्तरीय गंधहीन, रंगहीन पारदर्शी गैसीय आवरण है, जो पृथ्वी को चारों तरफ से घेरे हुए है। यह सौर विकरण की लघु तरंगों के लिए पारदर्शी हैं, जबकि पार्थिव विकरण की लम्बी तरंगों के लिए अपारदर्शी है । इस प्रकार वायुमण्डल पृथ्वी पर औसत तापमान बनाए रखता है, जो पृथ्वी पर जीवन का आधार है । वायुमण्डल पृथ्वी से उसके गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा सम्बद्ध है, जो पृथ्वी की सतह से 10,000 किमी की ऊँचाई तक पाया जाता है । वायुमण्डल सौर विकिरण की लघु तरंगों के लिए पारदर्शी, जबकि पार्थिव विकिरण की दीर्घ तरंगों के लिए अपारदर्शी होता है, इस कारण यह ग्लास हाऊस की भांति कार्य करता है । वायुमण्डल पर जीवन योग्यग औसत तापमान (15°C) बनाए रखता है। वायुमण्डल अलग-अलग घनत्व तथा तापमान वाली परतों का बना हुआ है, जिसका विस्तार 10,000 किमी की ऊँचाई तक मिलता है । तापमान की स्थिति तथा अन्य विशेषताओं के आधार पर इसे 05 विभिन्न स्तरों में बांटा गया है। क्षोभमण्डल (Troposphere) :- यह वायुमण्डल का सबसे निचला स्तर है, जिसकी ऊँचाई सतह से लगभग 13 किमी तक पाई जाती है, किन्तु ध्रुवों पर यह...

विश्व की सबसे बड़ी नदियां एवं संबंधित महाद्वीप

  विश्व की सबसे बड़ी नदियां एवं संबंधित महाद्वीप  :- नील नदी - अफ्रीका   अमेज़न नदी - दक्षिण अमेरिका  यांगटीसिकियांग - एशिया   मिसिसिपी-मिसौरी - उत्तर अमेरिका    आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमारी ऐसी ही ओर पोस्ट को देखिए और अपने सुझाव comments section में दीजिए। यह भी देखिए  :- सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र | Trick प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र संकटापन्न जंतुओं के लिए राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य भारत के रेलवे जोन भारत के प्रमुख बंदरगाह भारत का भूगोल | सामान्य जानकारी

क्षेत्रफल में विश्व के सबसे बड़े एवं छोटे देश एवं अवस्थिति

क्षेत्रफल में विशव के सबसे बड़े देश एवं अवस्थिति :- रूस - यूरोप तथा एशिया कनाडा - उत्तरी अमेरिका चीन - एशिया यू. एस. ए. - उत्तरी अमेरिका  ब्राजील - दक्षिण अमेरिका आस्टेलिया - ओशेनिया भारत -  एशिया क्षेत्रफल में विश्व के सबसे छोटे देश एवं अवस्थिति :- वेटिकन सिटी -  यूरोप   मोनाको -  यूरोप   नौरू -  दक्षिण प्रशांत महासागर  तुवालू -  दक्षिण प्रशांत महासागर  सान मैरिनो -  यूरोप   लिचेंस्टीन -  यूरोप   मार्शल द्वीप -  मध्य प्रशांत महासागर  आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमारी ऐसी ही ओर पोस्ट को देखिए और अपने सुझाव comments section में दीजिए। यह भी देखिए  :- सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र | Trick प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र संकटापन्न जंतुओं के लिए राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य भारत के रेलवे जोन भारत के प्रमुख बंदरगाह भारत का भूगोल | सामान्य जानकारी भूगोल | ब्रह्मांड | सौरमंडल की जानकारी विश्व की प्रमुख जल सन्धियां चट्टान |आग्नेय|अवसादी|कायांतरित पृथ्वी की आंतरिक संरचना | सीमा क्षेत्र विश्व के प्रमुख...

विश्व की स्थानीय पवनें

  विश्व की स्थानीय पवनें  :- किसी स्थान विशेष में प्रचलित हवाओं के विपरीत चलने चाली पवनों को स्थानीय पवनें कहा जाता है । ये पवनें तापमान एवं वायुदाब के स्थानीय अंतर से चला करती हैँ और बहुत छोटे क्षेत्र को प्रभावित करती हैं । जहां एक और गर्म स्थानीय पवनें किसी स्थान विशेष तापमान में वृद्धि लाती है तो वहीं दूसरी और ठंडी स्थानीय पवनें कभी-कभी तापमान को हिमांक (Freezing point) से भी नीचे गिरा देती है। ये स्थानीय पवनें क्षोभमण्डल (Troposphere) की निचली परतों तक ही सीमित रहती है। कुछ प्रमुख स्थानीय पवनें निम्नलिखित हैं- फॉन (Fohn) :- उत्तरी अल्प्स की घाटियों में शिनूक के समान ही गर्म तथा शुष्क पवनें चलती हैं, जिन्हें फॉन कहा जाता है । इनका सर्वाधिक प्रभाव स्विट्जरलैंड में होता है । इन पवनों से जहाँ एक और बर्फ पिघल जाती है और मौसम सुहावना हो जाता है,तो वहीं दूसरी और इसके प्रभाव से अंगूर की फसल शीघ्र पक जाती है। सिराको (Sirocco) :- सहारा मरुस्थल से उत्तरी अफ्रीका, सिसली तथा दक्षिण इटली से गुजरने वाली शुष्क व रेत भरी पवनों को सिराको कहा जाता है । ये पवनें भू-मध्य सागर से गुज़रने ...

भारत की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं

  भारत की बहुउद्देशीय परियोजनाएं  :- भाखड़ा नांगल परियोजना :- सतलज नदी पर स्थित यह भारत की सबसे बडी बहुउदूदेशीय परियोजना है । सतलज पंजाब में प्रवाहित होने चाली 5 प्रमुख नदियों में से एक है । इस नदी के जल के समुचित प्रबंधन के लिए 1963 ईं . में भाखड़ा बांध का निर्माण किया गया । भाखड़ा नांगल परियोजना पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है । इस परियोजना के अन्तर्गत पंजाब में भाखड़ा तथा नांगल के समीप 2 विद्युत गृहों का भी निर्माण किया गया है । यह विश्व का सबसे बडा सीधा गुरुत्व बांध है, जिसके पीछे गोबिन्द सागर झील  का निर्माण किया गया है। व्यास परियोजना :- यह पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है, जिसका निर्माण व्यास नदी पर किया गया हैँ । व्यास नदी सिंधु तंत्र की एक महत्वपूर्ण नदी है । व्यास परियोजना के अन्तर्गत जिस जलाशय का निर्माण किया गया है, उसे पोंग जलाशय कहते हैं । व्यास नदी पंजाब के हरिके नामक स्थान पर सतलज नदी में मिलती है तथा यहीं पर एक हरिके बैराज का निर्माण किया गया है । इस बैराज से एक नहर निकाली गई है, जो राजस्थान के पश्चिमी जिलों की सि...

प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र

  प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र  :- हिमालयी   नदी तंत्र की तुलना में प्रायद्वीपीय नदी तंत्र प्राचीन है। प्रायद्वीपीय भारत का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व व दक्षिण-पूर्व की ओर है। यहां की अधिकांश नदियां पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है, जैसे - महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि। यहां उल्लेखनीय है कि नर्मदा और ताप्ती प्रायद्वीपीय भारत की दो ऐसी महत्वपूर्ण नदियां है, जो अपवाद स्वरूप पश्चिम की ओर बहते हुए अरब सागर में गिरती है। इसका महत्वपूर्ण कारण इन दोनों नदियों का भ्रंश घाटियों (Rift valley) से होकर बहना है। पश्चिमी घाट की अरब सागर में गिरने वाली नदियां प्रायः एश्चुरी का निर्माण करती है, जैसे - नर्मदा, ताप्ती; जबकि बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां डेल्टा का निर्माण करती है। प्रायद्वीपीय नदियों को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है- बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां। अरब सागर में गिरने वाली नदियां। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां :- गोदावरी :- गोदावरी  प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है। इसे वृद्...

सगरमाला परियोजना

  सगरमाला परियोजना  :- देश के सभी बंदरगाहों को आपस में जोड़ने, उन्हें नई तकनीकों से परिपूर्ण करने एवं समुद्री व्यापार को बढ़ाने के उद्देश्य से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 15 अगस्त 2003 को इस परियोजना की घोषणा की गई। इस परियोजना के तहत सार्वजनिक व निजी भागीदारी के माध्यम से पूर्वी व पश्चिमी तटों के प्रमुख बंदरगाहों का आधुनिकीकरण तथा आधुनिक क्षमता युक्त नए बंदरगाहों का निर्माण कर जल परिवहन को उन्नत किया जाएगा। इस परियोजना के पहले चरण में न्हावाशेवा   व कोचीन  बंदरगाहों का विकास किया जा रहा है। यह भी देखें :  क्या है सेतुसमुद्रम परियोजना ? आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमारी ऐसी ही ओर पोस्ट को देखिए और अपने सुझाव comments section में दीजिए। यह भी देखिए  :- सिंधु नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र | Trick संकटापन्न जंतुओं के लिए राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य भारत के रेलवे जोन भारत के प्रमुख बंदरगाह भारत का भूगोल | सामान्य जानकारी भूगोल | ब्रह्मांड | सौरमंडल की जानकारी विश्व की प्रमुख जल सन्धियां चट्टान |आग्नेय|अवसादी|कायांतरित पृथ्वी की आंतरिक स...

क्या है सेतुसमुद्रम परियोजना ?

  सेतुसमुद्रम परियोजना  :- सेतुसमुद्रम परियोजना एक ऐसी परियोजना है जो बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर के बीच समुद्री मार्ग को सीधे आवाजाही के लिए खोल देगी। यह परियोजना भारत और श्रीलंका के मध्य पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी को जोड़ने वाली परियोजना है। यहां पर आदिकाल से द्वीपों की एक श्रृखंला विस्तृत है, जिसे रामसेतु या आदम का पुल कहा जाता है। यह भारत के पम्बन द्वीप के अंतिम छोर धनुष्कोंडि से प्रारंभ होकर श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक विस्तृत है। सेतुसमुद्रम परियोजना के तहत पाक जलडमरूमध्य तथा मन्नार की खाड़ी के मध्य 167 किमी लंबी सेतुसमुद्रम नहर के निर्माण का प्रस्ताव है। इससे बंगाल की खाड़ी से हिन्द महासागर में आने वाले जहाजों को 650 किमी कम दूरी तय करनी पड़ेगी।               सेतुसमुद्रम परियोजना इस परियोजना का विचार सबसे पहले 1860 में तत्कालीन नौ-सेना कमांडर एल्फ्रेड टेलर ने किया था, परन्तु वर्तमान में रामसेतु का हवाला देकर तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों को लेकर यह परियोजना विवाद में बनी हुई है। आपको हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो हमारी ऐसी...

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र  :- ब्रम्हपुत्र नदी का उद्गम हिमालय के उत्तर में स्थित मानसरोवर झील के निकट चेम्यांगडुंग ग्लेशियर से होता है। तिब्बत में ब्रम्हपुत्र को सांगपो  (Tsangpo) के नाम से जाना जाता। है। नामचा बरवा के निकट हिमालय को काटकर तथा U-टर्न बनाते हुए गहरे गार्ज का निर्माण करती है और  दिहांग  के नाम से अरुणाचल प्रदेश से भारत में प्रवेश करती है। कुछ दूर तक दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहने के बाद इसकी दो प्रमुख सहायक नदियां दिवांग  और लोहित इसके बाएं किनारे पर आकर मिलती है। इसके बाद इसे ब्रम्हपुत्र के नाम से जाना जाता है। इसकी अन्य सहायक नदियां - धनश्री, सबनसिरी , मानस , पगलादिया आदि है। ब्रम्हपुत्र नदी की कुल लंबाई 2900 किमी है, जिसमें 916 किमी भारत में बहती है।                       ब्रम्हपुत्र नदी तंत्र असम के धुबरी के निकट ब्रम्हपुत्र दक्षिण दिशा में बहती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है। बांग्लादेश में ब्रम्हपुत्र को जमुना  नाम से जाना जाता है। जमुना में दाहिनी ओर से तीस्ता नदी   आकर ...

सिंधु नदी तंत्र

सिंधु नदी तंत्र  :- सिंधु नदी तंत्र विश्व के विशालतम नदी तंत्रों में से एक है, जिसकी सबसे बड़ी नदी सिंधु है। इसके अंतर्गत सिंधु तथा उसकी सहायक नदियां झेलम , चिनाब , रावी , व्यास , सतलज आदि आती है। सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील के निकट चेम्यांगडुंग ग्लेशियर से होता है। इसकी कुल लंबाई 2880 किमी है। सिंधु में दायीं ओर से मिलने वाली नदियों में श्योक , काबुल , कुर्रम आदि है। भारत तथा पाकिस्तान के मध्य 1960 ई. में हुए सिंधु जल समझौते  के तहत सिंधु, झेलम तथा चिनाब के जलाधिकार पाकिस्तान को और इनकी तीन पूर्वी सहायक नदियों रावी , व्यास तथा सतलज के जलाधिकार भारत को दिए गए है। सिंधु नदी में बांयीं और से मिलने वाली पांच नदियां झेलम , चिनाब , रावी , व्यास और सतलज है। इन पांचों की संयुक्त धारा सिंधु नदी की मुख्य धारा में पाकिस्तान के मीठनकोट के पास मिलती है। सिंधु कराची के पूर्व में अरब सागर में मिल जाती है।                     सिंधु नदी तंत्र झेलम सिंधु की सहायक नदी है जिसका उद्गम कश्मीर के वेरीनाग के निकट ...