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मध्यकालीन भारत | एक वाक्य में तथ्य

भारत पर अरबों के आक्रमण से लेकर सल्तनत कालीन साम्राज्य की सम्पूर्ण जानकारी :-

  1. मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में सन् 712 ई. में सिंध पर अरबों ने पहला सफल आक्रमण किया। इस समय सिंध का राजा दाहिर था।
महमूूद गजनी :-
  1. गजनी साम्राज्य की स्थापना तुर्क सरदार अलप्तगीन ने 932 ई. में की।
  2. प्रथम तुर्क आक्रमण के समय पंजाब का शासक जयपाल था।
  3. सबुक्तगीन , अलप्तगीन का गुलाम और दामाद था , जो 977 ई. में गद्दी पर बैठा 
  4. सुबुक्तगीन का पुत्र महमूद गजनी था , जो 998 ई. में 27 वर्ष की उम्र में गद्दी पर बैठा ।
  5. महमूद गजनी ने 2 उपाधि ग्रहण की - 1) यामीन - उद् - दौरा 2) यामीन - उल - मिल्लाह
  6. महमूद गजनी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किए।
  7. 1001 ई. में गजनी ने शाही राजा जयपाल पर आक्रमण कर हरा दिया।
  8. 1025 ई. में गजनी ने सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण किया , संपत्ति की दृष्टि से यह सबसे बड़ा आक्रमण था।
  9. महमूद गजनी पर अंतिम आक्रमण 1027 ई. में जाटों द्वारा हुआ ।
  10. 1030 ई. में महमूद गजनी की मृत्यु हो गई।
  11. सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला वह प्रथम शासक था।
  12. इसके दरबार में अलबरूनी , फिरदौषी , उत्बी तथा फरूखी रहते थे।
  13. किताब - उल - हिन्द की रचना अलबरूनी ने की है।
  14. शहनामा की रचना फिरदौषी ने की है।
मुहम्मद गोरी :-
  • पूरा नाम - शाहबुद्दीन मुहम्मद गोरी
  • 1173 ई. में वह गौर का शासक बना।
  • भारत पर पहला आक्रमण मुल्तान के विरुद्ध 1175 ई. में किया।
  • 1178 ई. में इसने पाटन (गुजरात) पर दूसरा आक्रमण किया , जहां के राजा भीम II ने गोरी को परास्त किया।
  • मुहम्मद गोरी द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध -
  1. तराइन का प्रथम युद्ध (1191) - गोरी और पृथ्वीराज चौहान - चौहान विजय।
  2. तराइन का द्वितीय युद्ध (1192) - गोरी और पृथ्वीराज चौहान - गोरी विजय।
  3. चंदावर का युद्ध (1194) - गोरी और जयचंद - गोरी विजय।
  • तराइन का प्रथम युद्ध (1191) में पृथ्वीराज चौहान का सेनापति स्कंद था।
  • मुहम्मद गोरी का गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक था , जिसे वह शासन का भार सौंप कर गजनी चला गया।
  • 15 मार्च 1206 ई. में मुहम्मद गोरी की हत्या कर दी गई।

सल्तनत काल :-

गुलाम वंश (1206 - 1290 ई.) :-
कुतुबुद्दीन ऐबक:-
  • गुलाम वंश की स्थपना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी , जो गोरी का गुलाम था।
  • इसने अपनी राजधानी लाहौर में बनाई।
  • कुतुबमीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की याद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया।
  • दिल्ली में कुवत - उल - इस्लाम मस्जिद
  • तथा अजमेर में ढाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण भी कराया।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक को लाख बख्श (लाखो का दान देने वाला) भी कहा जाता है।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु 1210 ई. में चोगान खेलते समय घोड़े से गिर कर हो गई।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी आरामशाह हुए जिसने सिर्फ 8 माह शासन किया।

इल्तुतमिश :-

  • आरामशाह की हत्या कर इल्तुतमिश (इल्बरी तुर्क) 1211 ई. में दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
  • इल्तुतमिश ने राजधानी लाहौर से दिल्ली स्थनांतरित की।
  • इल्तुतमिश पहला शासक था जिसने सुल्तान पद की वैधानिक मान्यता बगदाद के खलीफा से प्राप्त की।
  • इल्तुतमिश ने ही कुतुबमीनार के निर्माण को पूर्ण कराया ।
  • सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए (चांदी का टंका , तांबे का जीताल)।
  • इसने ही सर्वप्रथम तुर्क - ऐ - चहलगानी के नाम से 40 लोगो का दल बनाया।
  • सन् 1236 ई. में इल्तुतमिश की मृत्यु हो गई।

रूकनुद्दीन फिरोज :- 

  • इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद उसका पुत्र रूकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठा , पर शासन पर उसकी मां शाह तुरकान छाई रही।
  • शाह तुरकान के अवांछित व्यवहार से , रजिया (इल्तुतमिश की पुत्री) प्रजा की मदद से दिल्ली की शासिका बनी।

रजिया सुल्तान :- 

  • दिल्ली की प्रथम व अंतिम मुस्लिम महिला शासीका।
  • रजिया ने पर्दा प्रथा का त्याग कर चोगा (काबा) और कुलाह (टोपी) पहनकर राजदरबार में खुले मुंह जाने लगी।
  • इसके समय जमालुद्दीन याकूत को अमीर - ए - आखुर (घोड़े का सरदार) नियुक्त किया गया।
  • गैर तुर्कियों को सामंत बनाने के कारण , तुर्की अमीर उसके विरुद्ध हो गए और उसे बंदी बना लिया गया तथा दिल्ली का शासक मुइजुद्दीन बहरामशह को बनाया गया।
  • रजिया ने अल्तूनिया से शादी के पुनः अपना साम्राज्य हासिल करना चाहा पर वह असफल रही।
  • 13 अक्टूबर 1240 को रजिया की हत्या डाकुओं के द्वारा कैथल में कर दी गई।
  • मुइजुद्दीन बहरामशह को बंदी बनाकर उसकी हत्या 1242 ई. में कर दी गई।
  • इसके बाद दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन मसूद शाह बना ,जिसे बलवन (वास्तविक नाम - बहाउद्दीन) ने षड्यंत्र द्वारा 1246 में पद से हटाकर नसीरुद्दीन महमूद को सुल्तान बना दिया।
  • नसीरुद्दीन महमूद टोपी सीकर अपना जीवन निर्वाह करता था।

बलवान :-

  • बलवन इल्तुतमिश का गुलाम था
  • 1266 ई. में दिल्ली की राजगद्दी पर बैठा।
  • इसी ने तुर्क - ऐ - चहलगानी को समाप्त किया।
  • इसने 2 प्रथा की शुरुआत की - 1) सिजदा 2) पैबोस
  • इसी ने नवरोज उत्सव का प्रारंभ किया।
  • बलवन ने अपने विरोधियों के लिए लौह एवम् रक्त की नीति का पालन किया।
  • नसीरुद्दीन महमूद  ने बलवन को उलूग खां की उपाधि दी।
  • बलवन के दरबार में प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो (मूल नाम - मुहम्मद हसन) एवम् अमीर हसन रहते थे।
  • गुलाम वंश का अंतिम शासक शमशुद्दीन कैमुर्स था।

खिलजी वंश (1290 - 1320 ई.) :- 

जलालुद्दीन फिरोज खिलजी :-
  • गुलाम वंश के अंतिम शासक को समाप्त कर जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने , खिलजी वंश की स्थापना की ।
  • इसने किलोखोरी को अपनी राजधानी बनाया।
  • 1296 में जलालुद्दीन खिलजी की हत्या उसके भतीजे एवम् दामाद अलाउद्दीन खिलजी ने कर दी।
अलाउद्दीन खिलजी :- 
  • 22 अक्टूबर 1296 को अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का सुल्तान बना।
  • अलाउद्दीन खिलजी के बचपन का नाम अली या गुरशास्प था।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने स्थाई सेना की व्यवस्था प्रारंभ की , तथा उन्हें नगद वेतन देना प्रारंभ किया।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने ही घोड़ा दागना तथा हुलिया व्यवस्था को प्रारंभ किया।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व की दर को बढ़ा कर उपज का 1/2 भाग वसूला।
  • इसने अपने शासन काल में मूल्य नियंत्रण प्रणाली को लागू किया।
  • दक्षिण भारत की विजय के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने मालिक काफूर को भेजा।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने निम्न का निर्माण कराया -
  1. जमैयत खाना मस्जिद 
  2. अलाई दरवाजा (इस्लामी वास्तुकला का रत्न कहा जाता है)
  3. सीरी का किला
  4. हजार खंबा महल
  • अलाउद्दीन खिलजी ने सिकंदर - ए - सानी की उपाधि से स्वयं को विभूषित किया।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने मालिक याकूब को दीवान - ए - रियासत नियुक्त किया ।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने शहना - ए - मंडी तथा सराए - ए - अदल की स्थापना की।
  • अलाउद्दीन खिलजी की आर्थिक नीति की जानकारी जियाउद्दीन बरनी की कृति तारीखे फिरोजशाही से मिलती है।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने सर्वप्रथम इनाम एवम् वक्फ के अंतर्गत दी गई भूमि को वापस लेकर उसे खालसा भूमि में बदल दिया।
अलाउद्दीन खिलजी ने 2 नए कर लगाए -
  1. चराई कर - दुधारू पशुओं पर लगाया जाता था।
  2. गढ़ी कर - घरों एवम् झोपडी पर लगाया जाता था।
  • मृत्यु - 5 जनवरी 1316 ई. में हो गई।
  • कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 1316 ई. में सिंहासन पर बैठा , इसे नग्न स्त्री , पुरुष की संगत पसंद थी तथा वह कभी कभी दरबार में स्त्रियों के वस्त्र पहन कर आ जाता था।
  • मुबारक खां ने खलीफा की उपाधि धारण की थी।
  • मुबारक खां के वजीर खुसरो खां ने 15 अप्रैल 1320 ई. को इसकी हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली का शासक बना।
  • खुसरो खां ने पैगम्बर के सेनापति की उपाधि धारण की।

तुगलक वंश (1320-1414) :-

  • 5 सितंबर 1320 ई. को खुसरो खां को पराजित करके गाजी मलिक (गयासुद्दीन तुगलक) के नाम से 8 सितंबर 1320 ई. को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • गयासुद्दीन तुगलक ने सिंचाई के लिए कुओं एवम् नहरों का निर्माण कराया।
  • नहरों का निर्माण करने वाला गयासुद्दीन तुगलक प्रथम शासक था
  •  गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलकाबाद नगर बसाया , जिसे छप्पनकोट के नाम से जाना जाता है।
  • गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु 1325 ई. में जूना खां द्वारा बनवाए गए लकड़ी के महल में दब कर हो गई।
मुहम्मद बिन तुगलक :-
  • गयासुद्दीन के बाद जूना खां , मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • मध्यकालीन सभी सुलतानों में मुहम्मद बिन तुगलक सबसे शिक्षित व्यक्ति था।
  • मुहम्मद बिन तुगलक को अपनी असफल योजनाओं के कारण स्वप्नशील , पागल  एवम् रक्तपिपासु कहा जाता है।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि विकास के लिए अमीर - ए - कोही नामक विभाग की स्थापना की।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी स्थानांतरित की और उसका  नाम दौलताबाद रखा।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने सांकेतिक मुद्रा चलाई और उसका मूल्य चांदी के टंके के बराबर होता था।
  • मुहम्मद बिन तुगलक को प्रिंस ऑफ मनीअर्स के नाम से भी जाना जाता है।
  • अफ्रीकी यात्री इब्न बतूता 1333 में मुहम्मद बिन तुगलक के समय भारत आया जिसे सुल्तान ने दिल्ली का काजी नियुक्त किया तथा चीन का राजदूत नियुक्त कर चीन भेजा।
  •  इब्न बतूता की पुस्तक का नाम रहला है।
  • मुहम्मद बिन तुगलक  की मृत्यु 20 मार्च 1351 ई. को सिंध जाते समय थट्टा के निकट हो गई।

फिरोजशाह तुगलक :-

  • मुहम्मद बिन तुगलक  के बाद फिरोजशाह तुगलक का राज्याभिषेक हुआ 
  • फिरोजशाह तुगलक ने दो बार अपना राज्याभिषेक कराया।
  • फिरोजशाह तुगलक ने 24 करो को समाप्त कर केवल 4 कर वसूले -
  1. खराज (लगान) : गैर- मुसलमानों से लिया जाने वाला कर।
  2. खुम्स : युद्ध में लूट का माल
  3. जजिया : गैर- मुसलमानों पर धार्मिक कर।
  4. जकात : मुसलमानों पर धार्मिक कर।
  • फिरोजशाह तुगलक पहला शासक था जिसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।
  • फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई कर भी लगाया जो उपज का 1/10 भाग था।
  • फिरोजशाह तुगलक ने हिसार , फिरोजाबाद , फतेहाबाद , जौनपुर , फिरोजपुर नगरों की स्थापना की।
  • फिरोजशाह तुगलक ने खिज्राबाद एवम् मेरठ से अशोक के दो स्तंभों को लाकर दिल्ली में स्थापित किया।
  • फिरोजशाह तुगलक ने जरूरतमंदो के लिए दीवान - ए - खेरात नामक नए विभाग की स्थापना की।
  • फिरोजशाह तुगलक ने दासों की देखभाल के लिए दीवान - ए - बंदगान की स्थापना की।
  • इसने सैन्य पदो को वंशानुगत बना दिया।
  • इसने अपनी आत्मकथा फितुहात - ए - फिरोजशाही की रचना की।
  • फिरोजशाह तुगलक  ने जियाउद्दीन बरनी एवम् शम्स - ए - शिराज को अपना संरक्षण प्रदान किया।
  • इसने ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से लूटे गए 1300 ग्रंथो में से कुछ को फारसी के विद्वान अपाउद्दीन द्वारा दलायते - फिरोजशाही नाम से अनुवाद करवाया।
  • इसने अद्धा एवम् विख के नाम से चांदी और तांबे के मिश्रित सिक्के चलाए।
  • फिरोजशाह तुगलक ने दिल्ली में कोटला फिरोजशाह दुर्ग का निर्माण करवाया।
  • तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिरूद्दीन महमूद तुगलक था।
  • तैमूरलंग ने नासिरूद्दीन महमूद तुगलक के समय दिल्ली पर आक्रमण किया।

सैय्यद वंश (1414 - 1451 ई.) :-

खिज्र खां:-
  • सैय्यद वंश की संस्थापक - खिज्र खां
  • यह तैमूरलंग का सेनापति था।
  • इसने रैयत - ए - आला की उपाधि धारण की।
  • खिज्र खां की मृत्यु 20 मई 1421 में हो गई।
मुबारक खां :- 
  • खिज्र खां के पुत्र मुबारक खां ने शाह की उपाधि धारण की थी।
  • याहिना बिन अहमद सरहिंदी , मुबारकशाह के संरक्षण में था।
  • इनकी पुस्तक तारीख - ए - मुबारक शाही में सैय्यद वंश की जानकारी मिलती है।
  • मुबारकाबाद की स्थापना मुबारक शाह ने यमुना नदी के किनारे की।
  • सैय्यद वंश का अंतिम शासक अलाउद्दीन आलम शाह था।

लोदी वंश (1451-1526 ई.) :-

बहलोल लोदी :-
  • संस्थापक - बहलोल लोदी।
  • दिल्ली में प्रथम अफगान राज्य की स्थापना , बहलोल लोदी ने की।
  • वह अपने सरदारों की मकसद - ए - अली कहकर पुकारता था।
सिकंदर शाह :-
  • बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खां , सुल्तान सिकंदर शाह की उपाधि से दिल्ली का सुल्तान बना।
  • 1504 में सिकंदर लोदी ने आगरा शहर की स्थापना की।
  • इसने भूमि के मापन के लिए प्रामाणिक पैमाना गजे सिकंदरी का प्रचलन किया।
  • यह गुलरुखी नाम से फारसी कविताएं लिखता था।
  • इसने आगरा को नई राजधानी बनाया।
  • मृत्यु - 21 नवंबर 1517
इब्राहिम शाह :-
  • सिकंदर शाह का पुत्र इब्राहिम , इब्राहिम शाह की उपाधि से आगरा के सिंहासन पर बैठा।
  • पानीपत की प्रथम लड़ाई (1526) - इब्राहिम लोदी और बाबर के मध्य - बाबर विजय।
  • इस प्रकार इस युद्ध में इब्राहिम लोदी की मृत्यु हो गई।
इस प्रकार दिल्ली सल्तनत का अंत कर बाबर ने मुगल साम्राज्य की स्थापना की।

  • मंत्री और उनसे संबंधित विभाग :-

  1. वजीर (प्रधानमंत्री) : राजस्व विभाग
  2. मुशरिफ - ए - मुमालिक (महालेखाकार) : आय और व्यय का लेखा जोखा।
  3. मजमुआदर : उधार दिए गए धन का हिसाब रखना।
  4. खाजीन : कोषाध्यक्ष ।
  5. आरिज - ए- मुमालिक : दीवान - ए - अर्ज अथवा सैन्य विभाग का प्रमुख।
  6. सद्र - उस - सुदूर : धर्म एवम् दान विभाग का प्रमुख।
  7. काजी - उल - कजात : सुल्तान के बाद न्याय का सर्वोच्च अधिकारी।
  8. बरीद - ए - मुमालिक : गुप्तचर विभाग का प्रमुख।
  9. वकील - ए - दर : सुल्तान की व्यक्तिगत सेवाओं की देखभाल करता है।
  10. दीवान - ए - खेरात : दान विभाग।
  11. दीवान - ए - बंदगान : दास विभाग।
  12. दीवान - ए - इस्तिहाक : पेंशन विभाग।

  • विभाग एवम् उनको बनाने वाला सुल्तान :-

  1. दीवान ए मुस्तखराज - अलाउद्दीन खिलजी
  2. दीवान ए कोही - मुहम्मद बिन तुगलक
  3. दीवान ए अर्ज - बलवन
  4. दीवान ए बंदगान - फिरोजशाह तुगलक
  5. दीवान ए खैरात - फिरोजशाह तुगलक
  6. दीवान ए इस्तिहाक - फिरोजशाह तुगलक

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